अमरनाथ यात्रा, Amarnath Yatra

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अमरनाथ मंदिर (गुफा) Amarnath Mandir 

 
Amarnath Yatra: ‘जय बाबा बर्फानी की ‘ श्री अमरनाथ यात्रा हिन्दुओं का एक पवित्र धार्मिक स्थल है जहाँ हर वर्ष अमरनाथ यात्रा का आयोजन श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड और भारत सरकार द्वारा किया जाता है , श्री अमरनाथ धाम कश्मीर घाटी में स्थित है जहाँ देश भर के विभिन्न राज्यों एवं विदेशी नागरिक भी इस यात्रा में हिस्सा लेते है आइये हम आपको इस इस यात्रा से जुडी सभी महत्त्वपूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से अवगतकरते है
 
अमरनाथ गुफा का इतिहास | Amarnath Temple History in Hindi

अमरनाथ गुफा का इतिहास, Amarnath Temple History in Hindi

इतिहासकारों की मानें तो अमरनाथ गुफा का इतिहास आज से 5 हजार वर्ष प्राचीन माना जाता है। कहा जाता है कि गुफा महाभारत के समय मौजूद है। यह पवित्र स्थान काशी और चार धाम यात्रा से भी अधिक महत्वपूर्ण है जहाँ दर्शन करने से हजार गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। अमरनाथ शिवलिंग को ‘बाबा बर्फानी’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि भगवान शिव का रूप बर्फ से ही यहाँ प्रकट होता है। ये एक स्वयंभू शिवलिंग है, अर्थात स्वयं प्रकट होने वाला। लिद्दर घाटी में स्थित इस गुफा के बारे में मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया था।
 
अमरनाथ की कहानी क्या है? | Amarnath Mandir ki kahani kya hai?

 

मरनाथ की कहानी क्या है? | Amarnath Mandir ki kahani kya hai

अमरनाथ की कथा (Amarnath ki Katha) इस प्रकार है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को इस स्थान पर कहानी या मंत्र सुनाया था जिसका संबंध अमरता प्राप्त करने से था। भगवान शिव अमरता की इस कहानी को किसी को सुनाना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने एक स्थान को चुना और उस दिशा में चल पड़े। अपने इस मार्ग में उन्होंने अपने द्वारपाल बैल नंदी, सर्प, चंद्रमा और अपने पुत्र गणेश समेत सब का त्याग कर दिया। इतना ही नहीं इन सभी का त्याग करने के साथ ही उन्होंने पंचतत्वों का भी त्याग कर दिया।
 
भगवान शिव के त्याग से ही यह हमें पता चलता है कि वे वाकई में अमरता के इस रहस्य को सभी से दूर रखना चाहते थे। अगर यह रहस्य सभी को पता चल जाता तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ सकता था। इस प्रकार सभी का त्याग करते हुए भगवान शिव माता पार्वती को लेकर अमरनाथ गुफा पहुंचे और उन्हें अमरता के कथा सुनाई। अपनी कथा को सुनाने से पूर्व उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि उस गुफा में कोई भी मौजूद न हो लेकिन इसके बावजूद इस स्थान पर शुक नामक पक्षी बैठा था जो उस कथा को बड़े ही ध्यानपूर्वक सुन रहा था। 

 

अमरनाथ की कहानी क्या है? | Amarnath Mandir ki kahani kya hai?
 
भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि मेरे कथा सुनने के दौरान तुम बीच – बीच में हुंकार भरती रहना ताकि मैं निरंतर कथा सुनाता रहूं। भगवान शिव ने अब कथा सुनाना शुरू कर लिया और देवी पार्वती हुंकार भरती रहीं परंतु एक समय ऐसा आया जब पार्वती जी को नींद आ गई। शिव ने कथा सुनाना जारी रखा तो पक्षी हुंकार देने लगा। इस पर भगवान शिव को संदेह हुआ कि कोई और उनकी कथा सुनकर हुंकार भर रहा है।
 
इसके बाद भगवान शिव उस पक्षी को मारने के लिए उसके पीछे दौड़े पर तब तक वह पक्षी बहुत ज्ञानी हो चुका था। अपने ज्ञान के बलबूते वह पक्षी माया का सहारा लेकर व्यास जी की पत्नी के गर्भ में धारण हो गया। सबसे आश्चर्य की बात कि वह शुक नामक पक्षी व्यास जी की पत्नी के गर्भ में लगभग 12 वर्षों तक रहा। यह देख भगवान विष्णु ने उनसे बाहर आने का आग्रह किया। तब जाकर वह पक्षी शुकदेव के रूप में पैदा हुए और संन्यासी बन गए। अमरनाथ गुफा में अक्सर एक कबूतर का जोड़ा दिखाई दिया करता है। ऐसा माना जाता है कि ये कबूतर अमर हैं क्योंकि किसी के अनुसार वे शिव के गण हैं जबकि कुछ का मानना है कि इन्होंने भी भगवान शिव की अमरता की कथा सुनी थी।
 
कबूतर की अमरता के बारे में इसलिए कहा जाता है कि अमरनाथ के पूरे इलाके में भारी बर्फबारी होती है और इतनी ठंड के बावजूद यह जोड़ा हमेशा वहां मौजूद रहता है। अमरनाथ गुफा के बारे में ऐसी मान्यताएं भी प्रचलित है कि यहां आने वाले हर भक्त को मोक्ष को प्राप्ति होती है और मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है।
 

अमरनाथ गुफा की खोज कब हुई? 

कश्मीर समेत पूरे भारत में अमरनाथ गुफा की खोज से संबंधित यह कहानी बहुत ही लोकप्रिय है कि इसकी खोज बूटा मालिक नामकर गड़रिये ने की थी। भेड़ चराने वाला बूटा मालिक (Buta Malik) एक बार भेड़ चराते हुए बहुत निकल गया। जब वह बर्फीले और सुनसान इलाके में पहुंचा तो उसकी मुलाकात एक साधु से हुई। उस साधु ने बूटा को कोयले से भरी एक कांगड़ी दे दी।
 

अमरनाथ मंदिर का रहस्य क्या है?

अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं।
 
जब बूटा वह कांगड़ी लेकर घर पहुंचा तो उसने कोयले की जगह उस स्थान पर सोना पाया। बूटा यह देखकर साधु का धन्यवाद करने उस स्थान पर पहुंचा तो उसे वहां कोई साधु तो नहीं मिला पर एक विशाल गुफा मिली। बूटा ने उस गुफा में जाकर देखा तो भगवान शिव वहां बर्फीले शिवलिंग के आकार में स्थापित हैं। बूटा ने यह बात गाँव के मुखिया को बताई और देखते ही देखते सभी इस गुफा के जानने लगे। इस तरह अमरनाथ की गुफा लोकप्रिय हुई और भक्त यहाँ दर्शन के लिए आने लगे।

 

अमरनाथ मंदिर की विशेषता क्या है?Amarnath Mandir ki visheshta kya hai?

कश्मीर की बर्फीली घाटियों में तीर्थो के तीर्थ कहे जाने वाले अमरनाथ मंदिर ( Amarnath Mandir ) की विशेषता यह है कि यहाँ दर्शन करने वालों को हजार गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। काशी के बाद मोक्ष प्राप्ति के लिए इस स्थान का अपना लाग महत्व है। इसी स्थान पर भगवान शिव ने अपनी अर्धांग्नी पार्वती जी को अमरत्व की कथा सुनाई थी। यहाँ प्राकृतिक रूप से बर्फ से बना स्वयंभू शिवलिंग मौजूद है जिसे हिमानी शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है।
 
अमरनाथ मंदिर की विशेषता क्या है? | Amarnath Mandir ki visheshta kya hai?

 

अमरनाथ में 2 कबूतर क्यों होते हैं? | Amarnath Mandir mai 2 kabootar kyu hote hai?

पौराणिक कथाओं के अनुसार अमरनाथ की इस पवित्र गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को मोक्ष का मार्ग दिखाया था. इस दौरान भोलेनाथ और माता पार्वती के बीच एक संवाद हुआ था.कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से मोक्ष का मार्ग जानने की उत्सुकता जताई. जिसके बाद भोलेनाथ उन्हें लेकर एकांत में गए जहां कोई अन्य इस संवाद को ना सुन सके. जब भगवान शिव यह अमृतज्ञान माता पार्वती को सुना रहे थे तो उस समय वहां एक कबूतर का जोड़ा उसी गुफा में मौजूद था. उस जोड़ें ने भी मोक्ष के मार्ग से जुड़ी वह कथा सुन ली. कहते हैं कि इस कथा को सुनने के बाद यह कबूतर को जोड़ा अमर हो गया और आज तक इस गुफा में मौजूद है.
 
अमरनाथ में 2 कबूतर क्यों होते हैं? | Amarnath Mandir mai 2 kabootar kyu hote hai?

अमरनाथ गुफा में शिवलिंग कैसे बनता है? | Amarnath Gufa mein Shivling kaise banta hai?

गुफा में बर्फीले पानी की बूंदें लगातार टपकती रहती हैं, इन्हीं बूंदों से लगभग यहां बर्फ का शिवलिंग बन जाता है। ये शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक रूप से ही बनता है। बहुत से लोग मानते हैं क‍ि इस शिवलिंग का निर्माण गुफा की छत से पानी की बूंदों के टपकने से होता है। यह बूंदे नीचे गिरते ही बर्फ का रूप लेकर ठोस हो जाती है। यही बर्फ एक विशाल लगभग 12 से 18 फीट तक ऊंचे शिवलिंग का रूप ले लेता है। कभी कभी यह 22 फीट तक होती है।
 
अमरनाथ गुफा में शिवलिंग कैसे बनता है? | Amarnath Gufa mein Shivling kaise banta hai?

अमरनाथ का शिवलिंग कब बनकर तैयार होता है? | Amarnath ka Shivling kab bankar taiyyar hota hai?

हिमालय की गोद में स्थित अमरनाथ बाबा का यह पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। यह एकमात्र शिवलिंग है, जिसका आकार चंद्रमा की रोशनी के आधार पर तय होता है। यह शिवलिंग सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पूरा हो जाता है और उसके बाद आने वाली अमावस्या तक आकार में काफी छोटा हो जाता है।
 

अमरनाथ यात्रा कब शुरू होती है When does Amarnath Yatra start ?

अमरनाथ यात्रा हर वर्ष जून माह के अंतिम सप्ताह में शुरू होकर लगभग डेढ़ महीने तक जारी रहते हुए रक्षा बंधन पर अगस्त माह में समाप्त होती है, यह यात्रा लगभग ४० से ५० दिन के मध्य जारी रहती है , जिन यात्रियों को इस यात्रा को करना होता है वो पहले से ही रजिस्ट्रेशन कराकर इस यात्रा में हिस्सा लेते है , यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पूर्व यहाँ छड़ी मुबारक यात्रा निकली जाती है जिसमे राज्य के प्रमुख लोग पहुंचकर बाबा बर्फानी के हिमलिंग के दर्शन प्राप्त करते है
 
अमरनाथ यात्रा कब शुरू होती है When does Amarnath Yatra start ?

अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन कैसे करे, How to register for Amarnath Yatra

अमरनाथ यात्रा हर वर्ष जून माह के अंतिम सप्ताह में शुरू होकर अगस्त माह में समाप्त होती है, अथवा इसके रजिस्ट्रेशन मार्च या अप्रैल माह में शुरू हो जाते है, अमरनाथ यात्रा की गत वर्ष से रजिस्ट्रेशन की दो प्रक्रिया है एक ऑनलाइन माध्यम से और एक बैंक के द्वारा रजिस्ट्रेशन, यात्रा के रेजिट्रेशन की तारीख के बारे में आप श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnath Ji Shrine Board) की वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कर सकते है जहाँ आप पहले आओ पहले पाओ के हिसाब से सभी भक्तो का रजिस्ट्रेशन किया जाता है ,
 

अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन बैंक द्वारा कैसे करें

सबसे पहले आपको श्री अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड की वेबसाइट से अमरनाथ यात्रा का फॉर्म निकालकर भरना पड़ता है उसमे आपको कुछ पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ की भी जरुरत पड़ती है उस फॉर्म को भरने के बाद आपको श्रीअमरनाथ जी श्राइन बोर्ड द्वारा दी गयी मान्य प्राप्त डॉक्टर्स की लिस्ट में से अपने शहर के डॉक्टर्स से जा कर अपने शरीर का जरुरी परिक्षण कराने के उपरांत वह फॉर्म आप श्राइन बोर्ड द्वारा निर्देशित बैंक में जाकर जमा कराये एवं वहां स्लॉट के हिसाब से आपको दिन और यात्रा की तारीख दे दी जाएगी
 

अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें

श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की अधिकृत वेबसाइट द्वारा आप ऑनलाइन रेजिट्रेशन कर सकते है जिसकी प्रक्रिया बहुत ही आसान है और अगर आप ऑनलाइन प्रक्रिया से अनभिज्ञ है तब आप अपने नजदीकी साइबर कैफ़े से जाकर यह रजिस्ट्रेशन करा सकते है श्राइन बोर्ड द्वारा तय फीस जमा कर के आप अपनी यात्रा की तारीख एवं तिथि तय कर सकते है ,वहां रजिस्ट्रेशन करने से पूर्व आपको मेडिकल जांच करना अनिवार्य है और उस फॉर्म को आप ऑनलाइन माध्यम से जमा कर सकते है.

 

अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें

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अमरनाथ गुफा तक कैसे पहुंचे हवाई जहाज, रेल, और बस से

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालू जाते हैं. अगर अब तक आपको बाबा अमरनाथ के दर्शन करने का मौका नहीं मिला या आप पहली बार अमरनाथ यात्रा के लिए प्लान कर रहे हैं तो पहले ये जान लें कि आप अपने घर से अमरनाथ तक कैसे पहुंचे. बस, ट्रेन या हवाई जहाज आप किसी से भी ट्रेवल कर सकते हैं लेकिन अमरनाथ के सबसे नजदीक कौन-सा एयरपोर्ट है, अमरनाथ धाम जाने के लिए सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन कौन-सा है या आप बस से सफर करने वाले हैं तो सबसे नजदीकी बस-अड्डा कौन-सा पड़ेगा ये हम आपको इस स्टोरी में बता रहे हैं.
 
अमरनाथ गुफा तक कैसे पहुंचे हवाई जहाज, रेल, और बस से
 
अमरनाथ गुफा के सबसे नज़दीक एयरपोर्ट: अमरनाथ गुफा का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है. यहां सभी बड़े शहरों के जहाज हर दिन आते और जाते हैं. श्रीनगर एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद आपको अमरनाथ गुफा तक जाने के लिए 2 रुट मिलेंगे पहलगाम और बालटाल. श्रीनगर से पहलगाम करीब 92 किलोमीटर और बालटाल करीब 93 किलोमीटर दूर है.

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अमरनाथ गुफा के सबसे नज़दीक रेलवे स्टेशन : पहलगाम से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उधमपुर है जो पहलगाम से करीब 217 किलोमीटर दूर है. लेकिन भारत के अन्य राज्यों से ज्यादातर ट्रेन जम्मू रेलवे स्टेशन आती हैं जिसे जम्मी तवी कहते हैं और जम्मू तवी से अमरनाथ के बेस कैंप पहलगाम और बालटाल की दूरी कितनी है ये भी जान लीजिए. जम्मू तवी रेलवे स्टेशन बालटाल लगभग 177 किमी दूर है जबकि पहलगाम 242 किलोमीटर है.

अमरनाथ गुफा के सबसे नज़दीक बस अड्डा: अगर आप अपने राज्य से बस मार्ग से अमरनाथ गुफा तक जाने का प्लान कर रहे हैं तो सरकारी बस रूट जम्मू के रघुनाथ मार्केट तक ही जाएंगे. इसके आगे आपको लोकल बस या टैक्सी करनी पड़ेगी. आपको जम्मू पहुंचे के बाद सबसे पहले अमरनाथ के बेस कैंप पहुंचना होगा जहां से अमरनाथ गुफा के लिए यात्रा शुरु होती है.
 

मरनाथ यात्रा में कहाँ कहाँ ठहरने की व्यवस्था होती है

श्री अमरनाथ यात्रा हर वर्ष की भांति दो अलग अलग रास्तो से शुरू की जाती है जिनमे एक है पहलगाम और दूसरा है बालटाल ,पहलगाम वाला जो रास्ता है वो यात्रा का पारम्परिक रास्ता है अगर आपकी यात्रा पहलगाम मार्ग से शुरू हुई है तब आपका पहला रात्रि विश्राम पड़ाव शेषनाग झील के समीप होगा जहाँ सर्कार द्वारा उचित ठहरने की और खाने पीने की बहुत ही अच्छी व्यवस्था की जाती है, यहाँ प्रति व्यक्ति ४५० रुपए का शुल्क देकर आप कैंप में ठहर सकते है और आपको खाने पीने के लिए फ्री भंडारे और लंगर वहां उपलब्ध होते है , दूसरा पड़ाव पंचतरणी पर होगा जो की शेषनाग झील से लगभग १६ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है , वहां भी आपको सरकारी कैंप में ठहरने के लिए ४००-५०० प्रति व्यक्ति का शुल्क देना पड़ता है और खाने पीने के फ्री भंडारे सभी यात्रियों के लिए उपलब्ध होते है
 
जब आप यात्रा बालटाल मार्ग से शुरू करते है तब आप दोमेल के रास्ते हुए बरारी टॉप और संगम टॉप मार्ग होते हुए सीधे अमरनाथ पवित्र गुफा के लिए प्रस्थान करते है बालटाल से पवित्र गुफा की दूरी सिर्फ १४ किलोमीटर है और इस मार्ग में आपको बीच में रुकने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं होता आपको सीधे गुफा के नजदीक जाकर वहां स्थित कैंप में जाकर नहाने धोने और ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है.
 

अमरनाथ यात्रा कितने दिन में संपूर्ण की जाती है

अगर आपकी यात्रा पहलगाम मार्ग से शुरू हो रही है तो आपको यात्रा पूरी करने में कम से कम तीन दिन का समय लगता है यानि की पहले दिन में आप चंदनवारी से शेषनाग झील पहुँचते है दूसरे दिन में आप शेषनाग झील से चलकर पंचतरणी यात्री बेस कैंप पहुँचते है जहाँ आप रात्रि विश्राम के बाद तीसरे दिन लगभग ६ किलोमीटर की यात्रा करने के बाद पवित्र गुफा तक पहुँचते है और उसी दिन दर्शन करने के उपरांत आप बालटाल के रास्ते सीधे बलतम बेस कैंप पहुँच कर अपनी यात्रा समाप्त कर सकते है।
 

अमरनाथ यात्रा पूरी करने के लिए क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध है

यूँ तो लाखों श्रद्धालु हर वर्ष अमरनाथ यात्रा पैदल मार्ग से पूरी की जाती है पर जो लोग पैदल चलने में अशमर्थ है वह खच्चर, पालकी एवं हेलीकॉप्टर मार्ग से भी अपनी यात्रा पूरी कर सकते है। सभी यात्रियों के लिए एक सुझाव है की वह खच्चर या पालकी श्राइन बोर्ड द्वारा अधिकृत पेड बूथ से पर्ची काटकर ही ले अथवा आपके साथ धोका हो सकता है , कई बार यात्रियों को उनके तय जगह के अलावा कहीं और उतार दिया जाता है जिससे उन्हें विशेष परेशानी का सामना उठाना पड़ता है 
 
इसके अलावा जगह जगह आपको भंडारे , नहाने धोने और शौचालय की बेहतरीन व्यवस्था उपलब्ध है , आपको जरुरी सामान उपलब्ध करने हेतु जगह जगह छोटे छोटे मार्किट भी उपलब्ध है जहाँ आपको हर जरुरी सामान यात्रा मार्ग में उपलब्ध हो जाता है
 
अगर आप बालटाल मार्ग से अपनी यात्रा प्रारम्भ कर रहे है तब आप एक रात पवित्र गुफा पर रूककर दूसरे दिन बालटाल मार्ग से ही वापस आकर अपनी यात्रा दो दिन में समाप्त कर सकते है
 
अमरनाथ यात्रा में ले जाने वाला जरुरी सामान
 
अमरनाथ यात्रा अति दुर्गम पहाड़ियों, झरनो, नदियों और झीलों से गुजरते हुए बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा तक पहुँचती है यहाँ आपको हर तरह के मौसम की परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए आपको कुछ जरुरी सामान हमेशा अपने साथ रखने चाहिए यात्रा मार्ग कोई सा भी हो ,
 
गर्म कपडे जो की वहां सबसे जरुरी है जैसे की जैकेट या स्वेटर , ऊनी मोज़े , दस्ताने , टोपा इत्यादि
 
बरसाती की जरुरत आपको कभी भी पड़ सकती है यहाँ बारिश होना एक साधारण प्रक्रिया है
 
जरुरी दवाये, कैंडी या टॉफी, टोर्च, कैमरा बैटरी, पावर बैंक, ट्रैकिंग जूते, मोबाइल फ़ोन, हल्का खाने पीने का सामान इत्यादि,  

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