कमलेश की अनोखी मुहब्बत, Kamalesh Ki Anokhi Muhabbat Love Story

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कमलेश की अनोखी मुहब्बत

भारत के बहुत से ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों के मुलाजिम, वहां के दुकानदार और तमाम लोग दिनेश को पहचानते थे. इस बार दिनेश गाइड के रूप में बोधगया गया हुआ था. विदेशी पर्यटकों में उस की मुलाकात कमलेश और उस की मां से हुई.
 
दिनेश अपने घूमने फिरने के शौक को पूरा करने के लिए गाइड बन गया था. उस ने इतिहास औनर्स से ग्रेजुएशन की थी. उस के पास अपने पुरखों की खूब सारी दौलत थी. दिनेश के पिता एक किसान थे. पूरे इलाके में सब से ज्यादा जमीन उन्हीं के पास थी. उन्होंने खेती की देखभाल के लिए नौकर रखे हुए थे. दिनेश 3 बहनों में अकेला भाई था. तीनों बहनों की नामी खानदान में शादी हुई थी. दिनेश की मां एक घरेलू औरत थी.
 
Kamalesh Ki Anokhi Muhabbat Love Story
भारत के बहुत से ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों के मुलाजिम, वहां के दुकानदार और तमाम लोग दिनेश को पहचानते थे. इस बार दिनेश गाइड के रूप में बोधगया गया हुआ था. विदेशी पर्यटकों में उस की मुलाकात कमलेश और उस की मां से हुई.
 
कमलेश की उम्र 19 साल थी. वह अपनी मां के साथ ताजमहल देखने आई थी. कमलेश और उस की मां को दिनेश का जानकारी देने का तरीका बहुत पसंद आता है, इसलिए उन्होंने उसे अपना पर्सनल गाइड बना लिया. पहली ही नजर में कमलेश को दिनेश का कसरती बदन भा गया और वह उस के तीखे नैननक्श पर फिदा हो गई. दिनेश दोपहर के भोजन के लिए भारतीय व्यंजन खिलाने के लिए उन्हें एक होटल में ले गया. कमलेश को खाना इतना तीखा लगा कि उस ने पानी पीने की जल्दी में गरमगरम सब्जी दिनेश के ऊपर गिरा दी और फिर अपने रूमाल से बड़े प्यार और अपनेपन से साफ किया. अब दिनेश भी कमलेश की तरफ खिंचने लगा.
 
कमलेश और उस की मां की ताजमहल देखने की बहुत इच्छा थी और दिनेश का गांव आगरा में ताजमहल के पास ही था. बोधगया और एयरपोर्ट के रास्ते के बीच में बड़ी नदी पड़ती थी. बारिश की वजह से नदी अपने उफान पर थी. दिनेश के बारबार मना करने के बावजूद नाविक ने ज्यादा मुसाफिर अपनी नाव में बिठा लिए. नाव बीच नदी में जा कर अपना कंट्रोल खोने लगी और नदी में पलट गई. इस वजह से बहुत से लोगों की जानें चली गईं.
 
इस भयानक हादसे का कमलेश की मां पर बहुत बुरा असर पड़ा और उन्होंने उसी समय अपने देश लौट जाने का फैसला ले लिया. पर इस हादसे के बाद दिनेश कमलेश की निगाह में उस का असली हीरो बन गया. वह उसे मन ही मन अपना सबकुछ मानने लगी और उस की दीवानी हो गई. पर मां की जिद के आगे झुक कर कमलेश को वापस अपने देश लौट जाना पड़ा. पर अपने घर लौटने के बाद भी कमलेश दिन में एक बार दिनेश को फोन जरूर करती थी.
 
एक रात दिनेश अपने घर की छत पर बैठा हुआ था. गुलाबी मौसम था. दिनेश की छत पर गमलों में फूलों के पौधे लगे हुए थे. उन फूलों की खुशबू चारों तरफ फैल रही थी. उसी समय कमलेश का फोन आ गया. उस दिन दिनेश सुबह से ही रोमांटिक था. वह फोन पर कमलेश के बालों, होंठों और रंगरूप की बहुत तारीफ करने लगा और फिर हिम्मत कर के अपने प्यार का इजहार कर दिया.
 
कमलेश तो प्यार के ये खूबसूरत शब्द सुनने के लिए कब से बेकरार थी. वह बिना सोचेसमझे दिनेश के प्रस्ताव को अपना लेती है. फिर उन दोनों के प्यार का सिलसिला फोन पर शुरू हो जाता है. दोनों रोजाना फोन पर घंटों प्यार की बातें किया करते थे. उन्हीं दिनों एक बड़े घर से दिनेश की शादी का रिश्ता आया. दिनेश के ससुर ने दिनेश के पिताजी से यह वादा किया था कि दिनेश की शादी के बाद वे आगरा शहर की 10,000 गज जमीन दिनेश के नाम कर देंगे.
 
दिनेश कमलेश से प्यार करता था और उसी से शादी करना चाहता था, इसलिए उस ने शादी से साफ इनकार कर दिया. इस बात से नाराज दिनेश के पिताजी ने परिवार वालों को अपना घर छोड़ने की धमकी दी, इसलिए दिनेश की मां और तीनों बहनें बहुत घबरा गईं और उन्होंने दिनेश पर दबाव डाल कर उसे शादी करने के लिए मजबूर कर लिया.
 
दिनेश ने उन के प्यार और दुख को समझ कर अपना मन मार कर हां कह दी, पर कमलेश और अपने संबंध के बारे में अपनी मां और बहनों को भी बता दिया, फिर फोन कर के कमलेश को अपने घर की सारी समस्या समझा दी. दिनेश का फोन सुनने के बाद कमलेश ने अपनी मां को बताया कि वह दिनेश से बहुत प्यार करती है और वह उसी समय भारत आने का फैसला लेती है. दिनेश कमलेश और उस की मां को एयरपोर्ट से सीधे अपने घर ले कर आया. वहां उस की शादी की तैयारियां बहुत जोरशोर से चल रही थीं. शादी बहुत धूमधाम और शानोशौकत से होने वाली थी.
 
कमलेश से मिलने के बाद दिनेश की मां और उस की तीनों बहनों को कमलेश का स्वभाव इतना मीठा और सुंदर लगा कि वे भी कमलेश को पसंद करने लगीं. दिनेश के पिता को भी कमलेश बहुत अच्छी लड़की लगी. शादी के रीतिरिवाज शुरू हो गए थे. कमलेश को हलदी और गीतों की रस्म बहुत पसंद आई और उस की आंखों से आंसू बह निकले, क्योंकि वह बारबार यही सोच रही थी कि काश, वह दिनेश की दुलहन होती.
 
शादी का दिन आ गया और दिनेश की शादी भी हो गई. कमलेश की मां को भारतीय शादी के रीतिरिवाज और खानपान बहुत पसंद आया, पर उन्हें अपनी बेटी के दुख का एहसास भी था. उन्हें भी दिनेश बहुत पसंद था. दिनेश की बरात जिस दिन वापस आती है, कमलेश उसी दिन दुखी मन से अपनी मां के साथ अपने देश लौट जाने का फैसला लेती है. दिनेश बहुत गुजारिश कर के कमलेश को रोक लेता है. दिनेश उन से कहता है, ‘‘मैं जिंदगीभर आप लोगों को भूल नहीं सकता. मेरे घर के दरवाजे आप लोगों के लिए हमेशा खुले रहेंगे. मैं गाइड का काम छोड़ दूंगा. मेरी आखिरी इच्छा आप लोगों को ताजमहल दिखाने की है.’’
 
कमलेश और उस की मां दिनेश के साथ ताजमहल देखने के लिए तैयार हो जाते हैं. आज ही के दिन दिनेश की सुहागरात थी, पर दिनेश कमलेश और उस की मां को ताजमहल दिखाने के लिए घर से निकल जाता है.
 
दिनेश की मां और बहनें कमलेश और उस की मां को बहुत से उपहार देती हैं. उन्हें ताजमहल घुमाने के बाद दिनेश दोपहर को एक रैस्टोरैंट में ले कर जाता है. कमलेश को फिर खाना बहुत तीखा लगता है. वह हड़बड़ाहट में फिर उसी तरह गरम सब्जी दिनेश पर गिरा देती है. दोबारा वही घटना होने पर वे दोनों हंसने लगते हैं. फिर उन की आंखों में आंसू आ जाते हैं.
 
दिनेश कमलेश को छोटा सा खूबसूरत ताजमहल उपहार में देता है. कमलेश की मां को वह भारत की ऐतिहासिक चीजें उपहार में देता है. कमलेश एयरपोर्ट पर बारबार पीछे मुड़मुड़ कर दिनेश को देखती है, फिर ‘बायबाय’ कर के अपनी मां के साथ अपने देश चली जाती है. इस तरह कमलेश का प्यार अधूरा रह जाता है.
 
Thankyou…🙏🙏🙏
 
 
 

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