Love Story, Priyanka or Hemant Ki Anokhi Prem Kahani

Rate this post
 

Priyanka or Hemant Ki Anokhi Prem Kahani

 
नाम सुन के क्या लगता हैं आपको ? प्यार का एहसास क्या होता हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं प्यार का एहसास का मतलब क्या होता हैं।
 
ये कहानी एक रईस परिवार की लड़की जिसका नाम प्रियंका है और दूसरी और एक मध्यम परिवार का लड़का जिसका नाम हेमन्त हैं। दोनों एक दूसरे से बहुत अलग हैं लेकिन क्या उन्हें एक दूसरे से प्यार हो पायेगा चलिए जान लीजिये आप खुद ही।
 
प्रियंका बचपन से एक आलिशान घर, गाडी, और रहन-सहन में पली बड़ी है।वही हेमन्त बचपन से अपने परिवार को संघर्ष करता देख बड़े होते होते उससे अपने जिम्मेदारी का एहसास होने लगा।
Priyanka or Hemant Ki Anokhi Prem Kahani
ज्यादा पैसे न होने के कारन से वो ज्यादा पढ़-लिख ना सका , वही दूसरी और सब कुछ होने के बाद भी प्रियंका को पढ़ने – लिखने का मन ना होने के कारन पढ़ ना सकी। वक़्त के साथ साथ दोनों बड़े हुए अपने अपने रहन-सहन से।
 
एक और हेमन्त एक छोटे से कार कंपनी में काम करने लगा। वही दूसरी और प्रियंका अपने जिंदगी घूमने मस्ती में बिताने लगी। एक दिन आया जब दोनों का एक दूसरे से सामना हुआ, वो कुछ इस तरह हुआ की एक दिन हेमन्त एक कार को टेस्टिंग करने निकला था, वही प्रियंका अपने दोस्तों के साथ कार में घूमने निकली थी। थोड़ी दूर जा के प्रियंका की गाडी ख़राब हो गयी और उसी वक़्त हेमन्त ने देखा की कोई वहा लिफ्ट मांगते हाथ दिखा रहा हैं।
 
हेमन्त गाडी साइड में कर उतर के प्रियंका की और गया फिर क्या प्रियंका उससे देख पूछने लगी – “क्या आप हमे थोड़ी दूर तक छोड़ सकते हैं ? ” हेमन्त उसकी बातों को सुन के चुप चाप गाडी की और गया और गाडी चेक करने लगा।
 
ये देख प्रियंका को अच्छा नहीं लगा की वो किसी से पूछ रही है और हेमन्त जवाब नहीं दे रहा। हेमन्त कुछ देर बाद बिना किसी से कुछ कहे चले जाता है। ये देख प्रियंका को कुछ समझ नहीं आया तभी पीछे से आवाज आते हुए – ” प्रियंका गाडी चालू हो गयी अंदर आजा ” ये सुन प्रियंका उससे सुक्रिया करने जाती तब तक हेमन्त निकल चूका था। प्रियंका फिर गाडी में बैठ चले गयी।
 
एक दिन आया जब प्रियंका का जन्मदिन था वो हर साल की तरह अपने परिवार के साथ मंदिर गयी वहा उसने हेमन्त को फिरसे देखा वो देखते ही उसके पास गयी उससे उस दिन के लिए सुक्रिया कहने, ये सुन हेमन्त ने उससे देख मुस्कुरा दिया। ये देख प्रियंका ने हेमन्त से पुछा – ” क्या तुम बोल नहीं सकते ? उस दिन भी मैंने पुछा था तब भी कुछ नहीं बोले आज भी जब मैं खुद आयी तुम्हारे पास तुम्हे सुक्रिया कहने तोह आज भी बस मुस्कुरा दिए और कुछ कहा नहीं।फिर हेमन्त ने कहा की मुझे देर हो रही थी लेकिन मैंने वहां तुम्हे देखा की तुम लिफ्ट मांग रहे थे इसीलिए मैंने गाडी रोक के तुम्हारी गाडी ठीक करने चले आया।
 
फिर दोनों के बीच बाते चलने लगी फिर हेमन्त को देर हो रही थी तो हेमन्त ने कहा की अब मुझे जाना होगा मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रहा है। जाते जाते हेमन्त ने उससे दोस्ती की हाथ बढ़ाया कहा की क्या हम दोस्त बन सकते है ये सुन प्रियंका ने कहा – ” मुझसे दोस्ती ? में हर किसी से दोस्ती नहीं करती। ये सुन हेमन्त ने हस्ते हुए कहा चलो ठीक है कोई नहीं वक़्त बताएगा की दोस्ती करते हो या नहीं आप।ये बोल के वो चल दिया और वहा प्रियंका भी अपने घर की और निकल पड़ी।
 
कुछ दिनों बाद प्रियंका और हेमन्त एक मॉल में मिलते है, हेमन्त देख प्रियंका से पुछा – ” तुम यहां कैसे ? प्रियंका देखते हुए -” बस युही घूमने के लिए आयी हु तुम्हारा आज ऑफिस नहीं है जो यहां आये हुए हो ? हेमन्त ने कहा आज बस जल्दी काम खत्म हो गया था तो सोचा थोड़ा घूम लू। फिर दोनों एक कैफ़े में गए और बाते करने लगे। प्रियंका ने हेमन्त से कहा – ” अपने बारे में बताओगे कुछ ?
 
हेमन्त हस्ते हुए कहने लगा – ” में क्या बताऊ अपने बारे में मेरा तो बस एक साधा जिंदगी है जहाँ रोज सुबह ऑफिस जाता हूँ और शाम को घर जा के घर का कुछ काम कर लेता हूँ बस फिर खा के सो जाना फिर वही सुबह फिरसे।
 
फिर हेमन्त ने पुछा आप क्या करते हो ये सुन प्रियंका हसने लगी और कहा -” मुझे कुछ करने की जरुरत ही नहीं पड़ती सब बिना कुछ किये ही मिल जाता हैं तो क्यों करुँगी में कुछ।फिर हेमन्त ने कहा अच्छा हैं फिर तो हम बहुत अलग हुए।
 
ये सुन प्रियंका ने कहा हां अलग तो हुए हम फिर भी तुम्हारे साथ बैठी हूँ यहां। फिर हेमन्त ने कहा बैठी हु मतलब हम अलग है तोह सिर्फ रहन-सहन से बाकी हम दोनों एक ही है। अगर तुम दिल से किसी के बारे में सोचोगे तोह तुम्हे कोई अलग नजर नहीं आएगा। ये सुन प्रियंका ने कहा ये दिल कुछ नहीं होता हैं। हेमन्त सुन के मुस्कुराने लगा और कहा ठीक है जैसा तुम बोलो। फिर हर कुछ दिनों में दोनों मिलते रहते बाते करते और अपने घर चले जाते। धीरे-धीरे दोनों में बाते बढ़ने लगी और दोनों रोज मिलने लगे।
 
हेमन्त ऑफिस से निकल के मॉल चले जाता और वहां प्रियंका उसका इंतिज़ार करती रहती। फिर एक दिन प्रियंका ने कहा की मुझे एक पूरा दिन तुम्हारे साथ रहना है देखना है की क्या करते हो तुम पूरा दिन। फिर एक दिन हेमन्त का छुट्टी था ऑफिस का तोह उसने प्रियंका को मिलने के लिए बुला लिया।
 
फिर हेमन्त हमेसा कीतरह पहले मंदिर गया फिर वहा से आने के बाद मैदान गया जहां छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे वहां हेमन्त उनके साथ खेलने लगा फिर कुछ देर बाद हेमन्त वहां से आश्रम गया जहां वो हमेसा लोगो को खाना खिलता उनका कुछ देर देख भाल करता फिर चले आता फिर वहा से निकलने के बाद अपने घर आया और अपने माँ को बिठा के घर का बचा हुआ काम खत्म किया फिर रात हो गयी और
 
उसने प्रियंका को घर छोड़ आया और कहा – ” ये रहता है मेरा छुट्टी का दिन और यही है मेरी आम जिंदगी जहां जितना हो पता है उतना में करने की कोशिश करता हु।
 
ये सुन प्रियंका बिना कुछ कहे चले गयी और पूरी रात सोचते रही ऐसे भी लोग होते है जहां अपना छोड़ दूसरे के बारे में इतना सोचते है और एक में हु जो आज तक अपने माँ-पापा की मदत तो दूर आज तक पुछा भी नहीं की वो कैसे हैं ? वो करते क्या है ? ये सब सोच प्रियंका भावुक हो गई और अपने माँ के पास चले गयी उसने देखा माँ उसकी काम कर रही होती है जैसे ही वो माँ पुकारती है माँ वहां से क्या हुआ कुछ चाहिए तुम्हे बोलो ? ये सुन प्रियंका और भावुक हो गयी और माँ को कहते हुए नहीं कुछ नहीं बस युही आयी थी और वहां से चले गयी।
 
बस वो एक पल था जब प्रियंका को एहसास हुआ की सच में दिल से सोचने वाले लोग होते हैं। फिर क्या मानो प्रियंका की दुनिया ही बदल गयी अगली सुबह वो पापा के पास गयी और कहने लगी आज से में भी आपके साथ ऑफिस जाउंगी मुझे भी आपके काम का बोज उठाना है ये सुन पापा सोच में रह गए की क्या हो गया मेरी बेटी को आज इतने सालो बाद अचानक से ये ख्याल कैसे आया और अंदर ही अंदर खुश भी हो रहे थे की उनकी बेटी अब बड़ी हो रही है, अपने जिम्मेदारी समझने की काबिल बन गयी है।
 
बस फिर शाम को हमेसा की तरह वो हेमन्त से मिलने चले गयी बस फर्क इतना था आज की हमेसा वो घर से आती थी आज वो ऑफिस से आयी है। ये देख हेमन्त को खुसी हुए और उसने प्रियंका से पुछा – तो दिलो होता है न ?
 
ये सुन प्रियंका हसने लगी और उससे माफ़ी मांगते हुए उससे फिरसे सुक्रिया कहा की उसके वजह से आज वो अपने आप को पहचान पायी की उसकी जिंदगी जिंदगी क्या थी और वो किसे समझ बैठी थी। तो अब आगे क्या बताऊ आपको, आगे का तो आपको समझ आ गया होगा क्या हुआ रहेगा।
 
हर कहानी की तरह दोनों को अंत में एक दूसरे से प्यार हो गया और दोनों एक दूसरे के साथ रहने लगे। हेमन्त को एक साथी की जरुरत थी जो उसे समझे, प्यार करे और प्रियंका को सचाई की, एक जिम्मेदारी की जरुरत थी जो उससे हेमन्त ने दिखा दिया।
 
जाते जाते में आपको एक बात बताना ही भूल गया, दोनों एक दूसरे से मिले, बाते किये, घूमने, रहे एक दूसरे एक साथ लेकिन अभी तक दोनों ने एक दूसरे से अपना नाम नहीं पुछा। ना हेमन्त ने कभी पुछा की आपका नाम क्या हैं और नाही प्रियंका ने हेमन्त से कभी उसका नाम पुछा।
 
तो इस कहानी का अर्थ यही था की किसी की पहचान जानना या पूछना जरुरी नहीं। जरुरी बस यह है की आप बिना जाने कितना उसपे यकीन करते हो और उसकी मदत करते हो। प्रियंका एक ऐसी लड़की थी जिसे हमेसा से घूमना, मस्ती करना, ये सब में अच्छा लगता और हेमन्त एक ऐसा लड़का था जिसे हमेसा से उसकी जिम्मेदारी उसे पकड़ी रहती। दोनों एक दूसरे से काफी अलग थे लेकिन अंत वही एक दूसरे के लिए बन गए।
 
तो प्यार कभी भी और किसी से भी हो जाता है, आपको ना उस के लिए अपनी जिम्मेदारी से भटकना है और नाही उस के लिए कुर्बानी देनी है।
Thankyou,….🙏🙏🙏
 

Leave a Comment