सफलता कैसे मिलेगी, Swami Vivekanand Motivational Story

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सफलता कैसे मिलेगी, स्वामी विवेकानन्द

हर इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा प्रश्न यही होता है की मुझे सफलता कब मिलेगी और कैसे मिलेगी। हम पूरी जिंदगी सफलता पाने के पीछे लगा देते हैं। हर किसी की जिंदगी का एक सपना होता है और उस सपने को पा लेना ही सफलता होती है। लेकिन सफलता के मायने हर किसी के लिए अलग अलग होते हैं।किसी के लिए बहुत पैसे कमाना सफलता होती है, तो किसी के लिए एक अच्छी पोजिशन में पहुंचना सफलता होती है। वैसे इन सब में एक चीज कॉमन है वो है पैसे कमाना। हम सभी इस बात को मानते हैं की ज्यादा पैसे कमाना, या ज्यादा पैसे होना ही सफल होने की निशानी है।

 

आज स्वामी विवेकानंद की इस मोटिवेशनल स्टोरी के जरिए मैं आपको इस बात की जानकारी दूंगा की सफलता पाने के लिए स्वामी विवेकानंद ने क्या बात कही है। स्वामी विवेकानंद की इस सीख के जरिए आप जानेंगे की जिंदगी में सफलता पाने के लिए क्या जरूरी है।

 

स्वामी विवेकानन्द हिंदी प्रेरक कहानी

एक बार की बात है, स्वामी विवेकानंद अपने आश्रम में इधर उधर टहल रहे थे। कुछ देर बाद अचानक उनसे मिलने एक व्यक्ति आ गया। वो व्यक्ति कुछ उदास सा लग रहा था।उसने स्वामी विवेकानंद को प्रणाम किया और उदास स्वर में उनसे बोला, “महाराज में अपने जीवन से बहुत दुखी हूं। मैं दिन रात मेहनत करता हूं। मन लगाकर कर अपने सारे काम करता हूं, लेकिन फिर भी आजतक तक मैं एक सफल व्यक्ति नही बन पाया हूं। अब आप ही बताओ मैं क्या करूं ताकि मैं भी सफल बन सकूं।

 

उस व्यक्ति की बात सुनकर स्वामी विवेकानंद बोले, “तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए मुझे थोड़ा समय चाहिए। तब तक तुम एक काम करो आश्रम के बाहर एक पालतू कुत्ता बंधा है उसे थोड़ा दूर घुमा कर ले आओ। उनकी बात मानकर वो व्यक्ति उस पालतू कुत्ते को घुमाने चला गया। थोड़ा देर बाद वो व्यक्ति थका हारा कुत्ते को घुमा कर ले आया। कुत्ता भी तेज तेज हांफ रहा था।
 
उन दोनो को ऐसी हालत देख स्वामी विवेकानन्द ने उस व्यक्ति से पूछा, “तुम काफी थके हुवे लग रहे हो, ये कुत्ता भी हांफ रहा है, मैने तो तुम्हें बस इसे थोड़ा दूर तक ले जाना को कहा था, आंखिर ऐसा क्या हुवा तुम्हारे साथ? उनकी बात सुनकर उस व्यक्ति ने बताया, “महाराज मैं तो इस पालतू कुत्ते को सीधा सीधा रास्ते पर ही घूमा रहा था लेकिन ये कभी इधर भाग जाता तो कभी उधर, और अगर रास्ते में इसे कुछ दिखता तो या तो ये उसको पीछे भाग जाता या फिर उसके साथ खेलने लग जाता। ये सारे रास्ते भर खुद भी दौड़ता रहा और मुझे भी दौड़ता रहा इसलिए मैं इतना थक गया।

 

उस व्यक्ति की बात पूरी करने के बाद स्वामी विवेकानंद बोले, “तुम्हारी असफलता का कारण भी कुछ ऐसा ही है तुम अपनी मंजिल में सीधा जाने के बजाए इधर उधर भागते हो जिसकी वजह से तुम्हें सफलता नहीं मिलती। अगर सफल होना है तो तुम्हें अपनी मंजिल पर एकाग्र मन से चलना होगा, जब तक तुम्हारा मन इधर उधर भागता रहेगा तब तक तुम्हें असफलता ही मिलेगी।

सीख जो हमें स्वामी विवेकानंद की कहानी से मिलती है

जीवन में सफल होने का रास्ता ही यही है की हमारा ध्यान हमेशा हमारे लक्ष्य या मंजिल पर होना चाहिए। जब तक हमारा कोई लक्ष्य नही होगा तब तक हम इधर उधर भागते ही रहेंगे। बिना मंजिल के हमे पता ही नही चलेगा की हमें पहुंचना कहा है।और जब तक हमें यही पता ना हो की हमें कहां पहुंचना है तक तक हम सफल नहीं हो सकता। एक लक्ष्य का होना बहुत जरूरी है। अगर आप भी लगातार असफल हो रहें हैं तो सबसे पहले अपना एक लक्ष्य बनाएं और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्लानिंग करें। फिर उस प्लानिंग के हिसाब से मेहनत करें। सफलता आपको जरूर मिलेगी।

 

ऐसा नहीं है की लक्ष्य बनाते ही आपको सफलता मिल जाएगी, हो सकता कुछ असफलताओं का सामना भी करना पड़े। लेकिन उनसे आपको डरना नहीं है बल्कि उनसे सीख कर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते जाना है।

Thank you…🙏🙏🙏 

 

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